नारी
न सोने से तोल मुझे तु ,
न मिट्टी मे मिला तु,
देकर सपने उडणे के ,
मेरे पंखो को न काट तु,
हो अगर इन्सान
तो जरासी इन्सानियत दिखा तु|
न मिट्टी मे मिला तु,
देकर सपने उडणे के ,
मेरे पंखो को न काट तु,
हो अगर इन्सान
तो जरासी इन्सानियत दिखा तु|
मै मॉ हू तेरी,बहन हूँ,
नन्ही सी बेटी भी हूँ,
आने वाले इस कल को,
पैरोतले यु कुचल न तु,
हो अगर इन्सान
तो जरासी इन्सानियत दिखा तु|
नन्ही सी बेटी भी हूँ,
आने वाले इस कल को,
पैरोतले यु कुचल न तु,
हो अगर इन्सान
तो जरासी इन्सानियत दिखा तु|
ऑखो मै ख्वाब सजाये चलती हूँ,
हर रोज जिंदगी से लढती हूँ,
चल सकती हूँ हर मुश्किल राह मै,
नारी हूँ ! कमजोर नही !
मुझको मेरे दायरे सिखला न तु,
हर रोज जिंदगी से लढती हूँ,
चल सकती हूँ हर मुश्किल राह मै,
नारी हूँ ! कमजोर नही !
मुझको मेरे दायरे सिखला न तु,
बस!
हो अगर इन्सान
तो जरासी इन्सानियत दिखा तु|
N shivani
तो जरासी इन्सानियत दिखा तु|
N shivani



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